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पंचकर्म विधि के प्रति बढ़ रहा है रोगियों का रूझान

पंचकर्म विधि के प्रति बढ़ रहा है रोगियों का रूझान

Post By : Dastak Admin on 10-Sep-2018 21:38:51

panchkarma vidhi

 

सतना | भारत की आयुर्वेद पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली में जीवनशैली से जुड़ी तमाम बीमारियों और व्याधियों का समाधान मौजूद है। शरीर से विषाक्त और रोग पैदा करने वाले तत्वों को निकालने के लिए आयुर्वेद की पंचकर्म विधि का बहुधा इस्तेमाल किया जाता है। 
   पंचकर्म विधि के प्रति लगातार रोगियों का रूझान बढ़ रहा है और यहां शासकीय आयुष अस्पताल में रोगी पंचकर्म कराने आते हैं। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शोधन चिकित्सा (पंचकर्म) तथा शमन चिकित्सा (औषधियां) दो प्रकार से चिकित्सा की जाती है। रोग का निवारण सिर्फ औषधियों से हो जाएगा अथवा पंचकर्म की आवश्यकता होगी, इस बारे में रोगी का चिकित्सा क्रम निर्धारण किया जाता है। कुछ लोग स्वास्थ्यवर्द्धन के लिए भी पंचकर्म करवाते हैं। 

   जिला आयुष अस्पताल की आर.एम.ओ. डॉ. उमा पाठक ने यहां एक जानकारी में बताया कि पंचकर्म की विभिन्न विधियां हैं। इनमें वमन कर्म, विरेचन कर्म, अनुवासन (स्नेह) बस्ति, आस्थापनबस्ति, नस्य कर्म, पाचन, स्नेह, स्वेदन शामिल है। पंचकर्म के पश्चात जो आहार-बिहार तथा दिनचर्या का सेवन रोगी से करवाया जाता है, उसे पश्चात कर्म कहा जाता है। पश्चात कर्म का ठीक से पालन करने से रोगी को पंचकर्म का संपूर्ण लाभ प्राप्त होता है। 
    पंचकर्म चिकित्सा विधि का लाभ लेने के लिए जिला आयुष अस्पताल में हर माह करीब औसतन 350 रोगी आते हैं। यह संख्या औसत के हिसाब से सालभर में चार हजार से अधिक मरीज होती है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बुजुर्ग भी शामिल हैं। पंचकर्म से इलाज कराने वालों में जोड़ों का दर्द, सिरदर्द, कमर दर्द, बालों का झड़ना, अनिद्रा, लम्बे समय से सर्दी-जुकाम, खांसी, मस्तिष्कजन्य व्याधियां, पक्षाधात, पाचन संबंधी रोग, सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस, वृद्धवस्था आदि के मरीज सम्मिलित है। पंचकर्म के फायदों को देखते हुए पंचकर्म के प्रति आकर्षित होने वाले रोगियों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

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