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पक्की सड़क से गांव की बदली तस्वीर

पक्की सड़क से गांव की बदली तस्वीर

Post By : Dastak Admin on 31-Jul-2018 22:40:56

pm sadak yojna

उमरिया | आदिवासी बाहुल्य उमरिया जिले के अंतिम छोर एवं करकेली विकासखण्ड मुख्यालय से 40-50 किमी दूर डिण्डोरी, जिले की सीमा से लगे नक्सल संभावित 17 ग्रामों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 4 मार्ग लंबाई 52.74 किमी का कार्य पूरा कर लगभग 15 हजार आबादी को लाभान्वित किया गया है। इन मार्गो में घोघरी से छतैनी, मगर, गाजर, हर्रवाह से बुढ़िया, केरपानी, मझौली, बिलासपुर से जलधरा गाजर तथा कल्दा से बिछिया शामिल है। 
    आदिवासी एवं वनवासी क्षेत्रों में सड़क एवं पुलिया बन जाने से सरपट वाहन दौड़ने लगे है, गंभीर बीमारी की हालत मे 108 काल करने पर गावं तक एंबुलेंस आकर जिला चिकित्सालय मे मरीजों को सहजता से कम समय में पहुंचा दिया जाता है और शाम तक घर वापसी भी हो जाती है।
    कल्दा निवासी रामलाल ने बताया कि सड़क बनने पर पता चला कि गर्भवती महिलाओ को प्रसूति हेतु सरकार ने 108 एंबुलेंस चलाई है जो काल करने पर तत्काल आकर अस्पतताल पहुंचा देती है। दो दिन बाद जच्चा बच्चा घर मे वापस सकुशल आ जाते है, कोई परेशानी नही होती उपर से 1400 रू. का चेक भी साथ में मिलता है। अब वह दिन गया जब अस्पताल पहुचते पहुचते गर्भवती मां का रास्ते मे प्रसव हो जाता था कई बार तो जच्चा, बच्चा तक की मृत्यु हो जाया करती थी। 
    डामर रोड बनने से गेहूं चावल, मिट्टी का तेल सरकारी उचित मूल्य दुकान से बरसात के दिनो मे सहजता पूर्वक लाते है वही बच्चे भी स्कूल समय पर सरलता से आने जाने लगे है। मार्ग के बन जाने से ग्रामवासी अपनी फसलों को अच्छे दाम पर अब शहर ले जाकर बेच रहे है और अपनी आवश्यकता की चीजे सही दाम मे लाने लगे है। किसान फसलों की बुवाई के लिए शहर से अच्छे किस्म के बीज एवं खाद लाकर खेती के तौर तरीके बदले है जिससे कृषि की उत्पादकता भी बढ़ी है। 
रोड बनने से बिचौलियों से मिला छुटकारा
    आदिवासी एवं अति पिछड़े क्षेत्र मे डामरीकृत सड़क बन जाने से ग्रामवासियों को बिचौलियो से छुटकारा मिला है पहले सेठ साहूकार औने पौने दाम में उनकी वस्तुएं खरीद लेते और समान की मनमानी कीमत वसूल करते थे। अब शहर तक पहुच होने से बाजारू हर सामग्री की कीमत गांव वालो को मालूम हो चुकी है। अब कोई उन्हे ठग नही सकता है।
    कल्दा के ग्रामीणों ने बताया कि कक्षा 5 वीं या अधिकतम 8 वीं के बाद बच्चों की पढ़ाई बंद करा देते थे लेकिन आवागमन की सुविधा बढ़ने से बच्चे ही नही बच्चियो को भी बाहर स्कूल भेजने लगे है। 
    मार्गो के निर्माण होने से लाभांवित ग्रामवासियो में अत्यंत उत्साह देखने को मिल रहा है, अब भारत का नव निर्माण गांवों मे भी शुरू होना दिखाई दे रहा है।  सड़क बन जाने से गावं की तस्वीर एवं ग्रामवासियों की तकदीर बदली है। सड़क नही बनने के पूर्व की घटनाएं जब ग्रामीण बताते है तो दिल दहल उठता है पगडंडी, कच्ची सड़क, नदी नाले एवं घनी पहाड़ियो से गुजरते हुए वर्षा के दिनो मे लोग गांव के बाहर जाते थे बारिश के दिनो नदी नालो को पार करना जोखिम भरा काम था मुख्य मार्गो से संपर्क टूट जाता था, चार माह बच्चे स्कूल नही जा पाते थे बीमारी के समय भगवान भरोसे रह जाते थे ऐसे समय मे आकाल मृत्यु तक हो जाती थी।

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