खास खबरें यूडीए की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस, युवक ने काट ली हाथ की नस आधार है पूरी तरह सुरक्षित, इससे मिली आम नागरिक को पहचान : सुप्रीम कोर्ट यूएन में ट्रम्‍प ने की भारत की तारीफ 'लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला' बैडमिंटन स्‍टार साइन नेहवाल की बैडमिंटन खिलाड़ी पी कश्‍यप के साथ बनी जोड़ी, जल्‍द होने वाली है शादी पीएम मोदी पर अक्रामक हुए राहुल गांधी बोले, पीएम मोदी है 'कमांडर इन थीफ' श्रीदेवी की मौत के बाद इस तरह पिता और बहनों के करीब आये अर्जुन कपूर निफ्टी 11100 के पार, सेंसेक्स 200 अंक मजबूत संबल योजना में 2 करोड़ से अधिक श्रमिक लाभान्वित : राज्यमंत्री श्री पाटीदार टॉपर छात्रा से पहले भी कई लड़कियों को अपना शिकार बना चुके थे रेवाड़ी काण्‍ड के दरिंदे आज से शुरू होगा, पितृों का पूजन-तर्पण, पूर्णिमा का होगा पहला श्राद्ध

कारवां

कारवां

Post By : Dastak Admin on 05-Aug-2018 09:47:12

karwan movie review

कुछ फ़िल्मों की कहानी दरअसल कहानी की तरह बिल्कुल नहीं होती! क्योंकि उसमें टिपिकल हीरो हीरोइन नहीं होते, हीरो और विलेन की फाइट नहीं होती। मगर आपको सोचने पर विवश कर देती हैं। ऐसी ही एक फ़िल्म ‘कारवां’ इस हफ्ते बॉक्स ऑफिस पर उतरी है। इस फ़िल्म को डायरेक्ट किया है निर्देशक आकर्ष खुराना ने।

‘कारवां’ कहानी है हैरान परेशान अविनाश की। जो अपनी मर्जी के खिलाफ पिता के कहने पर सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता है। एक दिन अचानक उसे अपने पिता की मौत की ख़बर मिलती है। मगर कार्गो की गलती के कारण कॉफिन की अदला-बदली से उसके पिता का शव बेंगलुरु आने के बजाय कोच्चि पहुंच जाता है। और अविनाश चल पड़ता है इस यात्रा पर! इस यात्रा में उसका साथ देते हैं उसके मित्र शौकत (इरफ़ान ख़ान) और तान्या (मिथिला पारकर)। इन तीनों का कारवां चल पड़ता है और इस यात्रा के दौरान उन्हें अलग-अलग स्थितियों से गुजरना होता है!

सतही तौर पर तो यह यात्रा, यात्रा की तरह है। निर्देशक आकर्ष खुराना ने इस यात्रा को अंतर की यात्रा बनाया है। किस तरह यह तीनों किरदार जो अलग-अलग लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, इस बाहरी यात्रा के साथ-साथ अपने अंदर की यात्रा करते हैं। इसे बेहद खूबसूरती से फिल्म कारवां में दिखाया गया है।

अभिनय की बात करें तो दक्षिण भारत के सुपरस्टार ममूटी के बेटे दुलकर सलमान एक नैसर्गिक अभिनेता हैं उन्होंने अपनी पहली हिंदी डेब्यू में बड़े ही समर्थ रूप से अभिनय किया। उनकी हिंदी पर पकड़ और अभिनय के साथ-साथ भारी आवाज आपका दिल जीत लेती है। इरफान ख़ान अपने हर फिल्म में अपने किरदार को जीवंत बना ही देते हैं। इस फिल्म में भी शौकत छाए रहे! मिथिला पालकर आने वाले समय में एक सशक्त अभिनेत्री के तौर पर भरोसेमंद साबित हो सकती हैं बशर्ते बॉलीवुड उन्हें वह मौका दे।

कुल मिलाकर 'कारवां' फीलगुड फिल्म है जो आपको अनजाने में ही सोचने पर मजबूर कर देती है। हालांकि, फिल्म में कुछ कमियां भी है मगर वह कमियां फिल्म के नैरेटिव पर ज्यादा हावी नहीं होती। इसलिए आप इस फिल्म का आनंद उठा सकते हैं।

Tags: karwan movie review

Post your comment
Name
Email
Comment
 

मूवी रिव्यू

विविध