खास खबरें मोगली बाल उत्सव- 2018, एप्को में राज्य स्तरीय ट्रेनर एवं क्विज मास्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सीबीएसई ने दी बच्‍चों और अभिभावकों को 'मोमो चैलेंज' से दूर रहने की चेतावनी राफेड विवाद में पाक ने अड़ाई अपनी टांग, कहा- सरकार कर रही पीएम मोदी को बचाने की कोशिश एशिया कप : रोहित-धवन ने जमाया शतक, पाकिस्‍तान पर 9 विकेट से भारत की धमाकेदार जीत समाजवादी पार्टी की ‘सामाजिक न्याय व लोकतंत्र बचाओ’ यात्रा पहुँची जंतर-मंतर, पार्टी संस्थापक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भरी हुंकार सनी देओल-साक्षी तंवर स्‍टॉरर 'मोहल्‍ला अस्‍सी' आखिरकार इस दिन होगी रिलीज मुंबई में पेट्रोल के दाम पहुँचे 90 रूपये के करीब राष्ट्रीय स्कॉलरशिप परीक्षाओं के आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितम्बर बिहार के मुजफ्फरपुर में पूर्व मेयर समीर कुमार की कार में गोलियां से भून कर हत्‍या आज से शुरू होगा, पितृों का पूजन-तर्पण, पूर्णिमा का होगा पहला श्राद्ध

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।

Post By : Dastak Admin on 15-Jun-2018 08:59:33

अटल बिहारी वाजपेयी

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।
सत्य का संघर्ष सत्ता से,
न्याय लड़ता निरंकुशता से,
अंधेरे ने दी चुनौती है,
किरण अंतिम अस्त होती है।

दीप निष्ठा का‍ लिए निष्कम्प,
वज्र टूटे या उठे भूकंप,
यह बराबर का नहीं है युद्ध,
हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध
हर तरह के शस्त्र से है सज्ज,
और पशुबल हो उठा निर्लज्ज।

किंतु फिर भी जूझने का प्रण,
पुन: अंगद ने बढ़ाया चरण,
प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार,
समर्पण की मांग अस्वीकार।

दांव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते।
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।

Tags: अटल बिहारी वाजपेयी

Post your comment
Name
Email
Comment
 

काव्य रचना

विविध