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दुसरोंको दोष देने से पहले सोचें

दुसरोंको दोष देने से पहले सोचें

Post By : Dastak Admin on 02-Aug-2018 09:23:04

think before blame

एक महिला अपनी रेलवे का कई घंटो पहले से ही स्टेशन पर इंतज़ार कर रही थी। उसने खाने के लिए कुछ वेफर्स भी खरीद रखे थे और अपने बैठने के लिए जगह भी ढूंड रखी थी।

जगह मिलने के बाद उसने अपने बैग में से एक किताब निकाली और उस किताब पढ़ने में पूरी तरह से तल्लीन हो गयी। तभी उसे ये देखकर हैरानी हुई की एक आदमी उसी के बगल में आकार बैठा था। और उनकी बैग में रखे वेफर्स में से एक-एक कर के ले रहा था। लेकिन वो महिला इस दृश्य को बार-बार अनदेखा कर रही थी। इसके लिए वो अपना ध्यान वेफर्स चबाने में लगा रही थी।लेकिन वो चोर धीरे से एक-एक वेफर्स लेकर पैकेट में से वेफर्स को कम किये जा रहा था।

ये सब उसे बहोत गुस्सा दिला रहा था। उस समय उसके लिए एक-एक मिनट बिताना मुश्किल सा हो गया था। वो ये सोच रही थी के “अगर मै अच्छी महिला नहीं होती, तो निच्छित ही उसकी आखे काली कर देती” जैसे ही वो महिला पैकेट में से एक वेफर्स निकलती वैसे ही वो आदमी भी एक वेफर्स निकालता था। और अंत में जब पैकेट में एक ही वेफर्स बचा, तब उस महिला को हैरानी हुई की अब वो क्या करे।

एक मुस्कान और नाराजगी वाली ख़ुशी दिखाते हुए उसने वो वेफर्स लिया और बिच में से उसके दो टुकड़े कर दिए। उसने आधा टुकड़ा उस आदमी को दिया। जो इस से पहले उसके वेफर्स को लेकर खा रहा था। और जैसे ही वो आदमी उसे खाने लगा उस महिला ने उस से वो छीन लिया। वो महिला सोच रही थी की उसके वेफर्स देने पर वो आदमी उसे (महिला को) धन्यवाद भी क्यू नहीं कहता। वह महिला उस आदमी के बारे में बहोत बुरा सोच रही थी।
 
तभी वह महिला जिस रेलवे से जा रही थी। उस रेलवे की घोषणा होने लगी। इसीलिए उसने उस आदमी को गुस्से से देखते हुए अपना सामान लेकर अपनी रेलवे की और चली गयी।

रेलवे में जाने के बाद उसने अपना सामान अपनी सीट पर रखा और वही वो भी बैठ गयी। उसने अपनी बुक उठाई और उसे अपनी बैग में रखने गयी। जैसे ही उसने अपना बैग खोला उसे अपनी बैग में वही वेफर्स दिखाई दिए थे जो उसने स्टेशन पर ख़रीदे थे।

उस समय उस महिला को अपनी गलती का अहसास हुआ की वो आदमी उसके वेफर्स को नहीं खा रहा था बल्कि वो महिला उस आदमी के वेफर्स को खा रही थी। उस समय उस महिला को महसूस हुआ की वह चोर है। वह बुरी है वह उद्दिष्ट है। उसे ये अहसास हुआ की उसने उस आदमी से अच्छे से बात भी नहीं की और उसे धन्यवाद भी नही दिया। लेकिन उस समय बहोत देर हो चुकी थी।

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