खास खबरें महर्षि पाणिनि संस्कृत विवि में तीसरा युवा महोत्सव आज से शुरू सुरक्षा बलों की 100 कंपनियों ने की घाटी में कूच, यासीन मलिक को किया गया अरेस्ट पुलवामा हमला : दबाव में आया पाकिस्‍तान ने जैश-ए-मोहम्मद के मुख्‍यालयों का नियंत्रण अपने हाथ में लिया यहॉ शुरू होगा नये नियमों वाला क्रिकेट, टूर्नामेंट में खेली जाएंगी 100 बॉल पीएम मोदी आज राजस्‍थान में करेंगे करेंगे रैली, टोंक से करेंगे चुनावी अभियान की शुरूआत 'दिल चोरी साडा़ हो गया' को मिला सॉन्‍ग ऑफ दि ईयर का अवॉर्ड पीएफ पर बढ़ी ब्‍याज दर, नौकरीपेशा को होगा इतना लाभ मध्‍यप्रदेश में यहा मिला मिला 70 लाख टन सोने का भंडार PRC : अरूणाचल प्रदेश के ईंटानगर में भड़की हिंसा, इंटरनेट बंद संकष्टी चतुर्थी : श्री गणेश दूर कर देते है जीवन के सारे विघ्‍न

7/84 श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव

7/84 श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव

Post By : Dastak Admin on 02-Sep-2018 10:58:55

7/84 श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव


 
त्रिविष्टपेश्वरं देवि सप्तमं पर्वतात्मजे।
यस्य दर्शन मात्रेण लभ्यते तत्रिविष्टपम्।।

परिचय:
चौरासी महादेव में से एक त्रिविष्टपेश्वर महादेव की स्थापना स्वयं देवताओं ने की है जो महाकाल वन की सुंदरता और महत्ता दर्शाती है।

पौराणिक आधार:
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार देवऋषि नारद स्वर्गलोक में इंद्र देव के दर्शन करने गए। वहां इंद्र देव ने महामुनि नारद से महाकाल वन का माहात्म्य पूछा। तब नारद मुनि ने कहा महाकाल वन सब तीर्थों में उत्तम तीर्थ है। वहां साक्षात महेश्वर अपने गणों सहित निवास करते हैं। वहां साठ करोड़ हजार तथा साठ करोड़शत लिंग निवास करते हैं जो भक्ति और मुक्ति प्रदान करने वाले हैं। साथ ही वहां नव करोड़ों शक्तियां भी निवास करती हैं।

यह सुनकर इंद्र तथा अन्य देवता महाकाल वन पहुँचते हैं। वहां पहुँच कर देवता महाकाल वन को ब्रह्म लोक तथा विष्णु लोक से भी अधिक श्रेष्ठ पाते हैं। तब वहां आकाशवाणी हुई कि आप सभी देवता मिल कर एक लिंग की स्थापना कर्कोटक से पूरब में और महामाया के दक्षिण में करें। यह सुनकर देवताओं तथा इंद्र ने अपने नाम से त्रिविष्टपेश्वर महादेव की स्थापना की एवं उनका विधिवत पूजन अर्चन किया।

दर्शन लाभ एवं कहाँ स्थित है?
त्रिविष्टपेश्वर महादेव महाकाल मंदिर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के पीछे स्थित है। बारह मास महाकाल दर्शन को आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन कर मनोकामना की पूर्ती हेतु प्रार्थना करते हैं लेकिन अष्टमी, चतुर्दशी तथा संक्रांति के दिन पूजन अर्चन करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

Tags: 7/84 श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव

Post your comment
Name
Email
Comment
 

84 महादेव

विविध