खास खबरें वाट्सएप पर पोस्ट करने पर पटवारी की शिकायत, कलेक्टर ने उज्जैन किया अटैच पीएम मोदी ने की ट्विटर के सीईओ से मुलाकात, ट्विटर की तारीफ में बोले ये... अफरीदी ने इमरान को दी सलाह, कश्‍मीर को छोड़ पहले अपने 4 राज्‍य संभालें मिताली ने टी-20 में बनाया रिकॉर्ड, रोहित-विराट को भी पीछे छोड़ा राहुल गांधी की मौजूदगी में टिकट बंटवारे को लेकर पायलट और डूडी में कहासुनी लेक कोमो में सात जन्‍मों के बंधन में बंधे रणवीर-दीपिका, करण जौहर ने दी बधाई आज से दिल्‍ली में शुरू होगा ट्रेड फेयर, 18 से मिलेगी आम लोगों को एंट्री पीएम मोदी-राहुल गांधी 16 नवम्‍बर को मध्‍यप्रदेश के एक ही जिले करेगें रैलियां बहू और उसके परिजनों की प्रताड़ना से तंग आ ससुर खुद को गोली मार की आत्‍महत्‍या छठ पूजा : संतान प्राप्ति और उनकी मंगल कामना के लिए करते है सूर्य की उपासना

10/84 श्री कर्कोटकेश्वर महादेव

10/84 श्री कर्कोटकेश्वर महादेव

Post By : Dastak Admin on 07-Sep-2018 09:57:28

10/84 श्री कर्कोटकेश्वर महादेव

कर्कोटकेश्वर- संज्ञं च दशमं विद्धि पार्वती।
यस्य दर्शन मात्रेण विषैर्नैवाभिभूयते। ।

परिचय:
श्री कर्कोटकेश्वर महादेव की स्थापना की कथा कर्कोटक नामक सर्प और उसकी शिव आराधना से जुड़ी हुई है। श्री कर्कोटकेश्वर महादेव की कथा में धर्म आचरण की महत्ता दर्शाई गई है।

पौराणिक आधार एवं महत्व:
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार सर्पों की माता ने सर्पों के द्वारा अपना वचन भंग करने की दशा में श्राप दिया कि सारे सर्प जनमेजय के यज्ञ में जलकर भस्म हो जायेंगे। श्राप से भयभीत होकर कुछ सर्प हिमालय पर्वत पर तपस्या करने चले गए, कंबल नामक एक सर्प ब्रम्हाजी की शरण में गया और सर्प शंखचूड़ मणिपुर में गया। इसके साथ ही कालिया नामक सर्प यमुना में रहने चला गया, सर्प धृतराष्ट्र प्रयाग में, सर्प एलापत्रक ब्रम्ह्लोक में और अन्य सर्प कुरुक्षेत्र में जाकर तप करने लगे।

फिर सर्प एलापत्रक ने ब्रम्हाजी से कहा कि ‘प्रभु कृपया कोई उपाय बताइये जिससे हमें माता के श्राप से मुक्ति मिले और हमारा उद्धार हो। तब ब्रम्हाजी ने कहा आप महाकाल वन में जाकर महामाया के समीप स्थित देवताओं के स्वामी महादेव के दिव्य लिंग की आराधना करो। तब कर्कोटक नामक सर्प अपनी ही इच्छा से महामाया के पास स्थित दिव्य लिंग के सम्मुख बैठ शिव की स्तुति करने लगा। शिव ने प्रसन्न होकर कहा कि जो नाग धर्म का आचरण करेंगे उनका विनाश नहीं होगा। तभी से उस लिंग को कर्कोटकेश्वर के नाम से जाना जाता है।

दर्शन लाभ:
माना जाता है कि श्री कर्कोटकेश्वर महादेव के दर्शन करने से कुल में सर्पों की पीड़ा नहीं होती है और वंश में वृद्धि होती है। यहाँ बारह मास ही दर्शन का महत्व है लेकिन पंचमी, चतुर्दशी, रविवार और श्रावण मास में दर्शन का विशेष महत्व माना गया है।

कहाँ स्थित है?
श्री कर्कोटकेश्वर महादेव उज्जयिनी के प्रसिद्ध श्री हरसिद्धि मंदिर प्रांगण में स्थित है। हरसिद्धि दर्शन करने वाले लगभग सभी भक्तगण श्री कर्कोटकेश्वर महादेव की आराधना कर दर्शन लाभ लेते हैं।

Tags: 10/84 श्री कर्कोटकेश्वर महादेव

Post your comment
Name
Email
Comment
 

84 महादेव

विविध