खास खबरें एसआई सहित 90 पुलिसकर्मियों की अदला-बदली आयुष्मान योजना : हर 12 सेकेंड में हो रहा है एक गरीब का मुफ्त इलाज शटडाउन : 'भूखे' अमेरिकियों को मुफ्त में खाना खिला रहा है टेक्सास का गुरुद्वारा कल मेलबर्न में खेला जाएगा भारत बनाम ऑस्‍ट्रेलिया तीसरा वनडे मैच BSP और SP के गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल भी शामिल, इस तरह हुआ सीटों का बंटवारा सरेआम हुई दीपक कलाल की पिटाई, राखी सावंत ने किया था शादी का ऐलान वर्ल्ड रैंक में भारत की 49 यूनिवर्सिटी ने बनाई जगह, यहॉं देखे सूची एप्टीट्यूड टेस्ट दो पारी और पात्रता परीक्षा एक पारी में होगी सबसे बड़े स्‍लम धारावी के आएंगे अच्‍छे दिन, 70 हजार परिवारों को मिलेगा पक्‍का घर पौष मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से मिलता है संतान प्राप्ति का वरदान

12/84 श्री लोकपालेश्वर महादेव

12/84 श्री लोकपालेश्वर महादेव

Post By : Dastak Admin on 11-Sep-2018 14:41:41

12/84 श्री लोकपालेश्वर महादेव

द्वादशं विद्धि देवेशि, लोकपलेश्वरम् शिवं।
यस्य दर्शन मात्रेण, सर्वपापैः प्रमुच्यते। ।
परिचय:
श्री लोकपालेश्वर महादेव की कथा देवताओं पर दैत्यों के बढ़ते प्रभुत्व और फिर उनकी शिव आराधना द्वारा दैत्यों के संहार से जुड़ी हुई है।
पौराणिक मान्यता एवं आधार:
पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप द्वारा अनेक दैत्यगण पैदा हुए थे। उन्होंने वन पर्वतों में जा आश्रम नष्ट कर सम्पूर्ण पृथ्वी को उथल पुथल कर दिया। यज्ञ नष्ट हो गए। वेदों की ध्वनि बंद हो गई। पिंडदान देना बंद हो गए और पृथ्वी यज्ञ रहित हो गई। तब लोकपाल (देवतागण) भयभीत होकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और हाथ जोड़ कर प्रार्थना करने लगे कि प्रभु आपने पहले भी नमुचि, वृषभरवन, हिरण्यकशिपु, नरकासुर, मुरनामा, आदि दैत्यों से हमारी रक्षा की है। कृपा करके इन दैत्यों से भी हमारी रक्षा करें, हम आपकी शरण में है।

दूसरी ओर दैत्य अपना आधिपत्य बढ़ाते जा रहे थे। फिर स्वर्गपुरी में जाकर उन्होंने इंद्र को, दक्षिण दिशा में धर्मराज को, पश्चिम दिशा में जाकर जलराज वरुण को और उत्तर दिशा में कुबेर को जीत लिया। तब भगवान विष्णु ने देवताओं को व्याकुल देख उन्हें महाकाल वन जाने का उपाय बताया। उन्होंने कहा कि महाकाल वन में जाओ और देवाधिदेव महादेव की आराधना करो। यह सुनकर सभी लोकपाल महाकाल वन पहुंचे लेकिन वहां भी दैत्यों ने उनके मार्ग में अवरोध उत्पन्न किया।

तब नारायण के कहने पर वे भस्म लगा कर, घंटा, नुपूर, कपाल आदि धारण कर कापालिक वेश में महाकाल वन पहुंचे जहाँ उन्हें एक दिव्य लिंग के दर्शन हुए। पूर्ण श्रद्धा भाव से सभी लोकपाल उस लिंग की स्तुति करने लगे जिसके परिणामस्वरूप उस लिंग में से भयंकर ज्वालाएँ निकली और जहाँ जहाँ दानव थे वहां पहुँच कर उन सब दैत्यों को जलाकर भस्म कर दिया। समस्त लोकपालों ने इस लिंग की स्तुति की इसलिए इन्हें लोकपालेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।

दर्शन लाभ:
मान्यतानुसार यहाँ दर्शन कर लेने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। ऐसा भी माना जाता है कि यहाँ दर्शन करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यहाँ दर्शन बारह मास में कभी भी किये जा सकते हैं लेकिन संक्रांति, सोमवार, अष्टमी और चतुर्दशी के दिन दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।

कहाँ स्थित है?
उज्जैन स्थित श्री लोकपालेश्वर महादेव हरसिद्धि दरवाजे पर स्थित है। यहाँ आने के लिए निजी वाहन के अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का भी विकल्प है।

Tags: 12/84 श्री लोकपालेश्वर महादेव

Post your comment
Name
Email
Comment
 

84 महादेव

विविध