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बैंक सखी बन बनाया करियर "कहानी सच्ची है"

बैंक सखी बन बनाया करियर "कहानी सच्ची है"

Post By : Dastak Admin on 27-Aug-2018 22:17:09

bank sakhi


 
शाजापुर | घर की आर्थिक स्थिति से कमजोर होने के बावजूद अपनी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के बल पर इन बेटियों ने वो कर दिखाया जो शायद ही कोई कर सके। ग्राम मोहन बड़ोदिया की कुमारी मोनिका (एकता स्व-सहायता समूह) एवं ग्राम जसवाड़ा की कुमारी सुमन (सांवरिया स्व-सहायता समूह) ने लेखा कार्य (बुक कीपर) तथा आरसेटी उज्जैन से बैंक सखी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होने अपने-अपने ग्रामों में स्व-सहायता समूहों के बैंक से संबंधित कार्यों का निष्पादन प्रारंभ किया। बैंक सखी द्वारा बैंक एवं स्व-सहायता समूह एवं ग्राम संगठनों के बीच मध्यस्थता का कार्य किया जाता है। इससे दोनो बैंक सखियों को प्रत्येक के मान से 7000 रूपए न्यूनतम से लेकर 25000 रूपए तक प्रतिमाह की आमदनी प्राप्त हो रही है। बैंक सखियों को एनआरएलएम द्वारा प्रशिक्षण के दौरान 324 रूपए प्रतिदिन के मान से  10 दिन का मानदेय भी दिया गया। साथ ही समूह एवं ग्राम संगठनों का बुक्स ऑफ रिकार्ड रखने के लिए इन्हें 3500 रूपए प्रतिमाह की दर से मानदेय दिया जाता है। इनके द्वारा बैंक सखी के रूप में स्व-सहायता समूहों की बैंकों में खाते खुलवाने, राशि का लेनदेन करवाने, बीमा कराने और समूहों द्वारा लिए गए ऋण की वापसी कराने का कार्य किया जाता है, जिसके बदले इन्हे कमीशन प्राप्त होता है। यह कमीशन 7 हजार रूपए से लेकर 25 हजार रूपए तक हो जाता है। दोनो बैंक सखियां बताती है कि अब उनका परिवार खुशी से जीवन यापन कर रहा है।

 

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