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सोयाबीन की फसल में कीट प्रकोप होने पर किसान समय से उन पर नियंत्रण करें

सोयाबीन की फसल में कीट प्रकोप होने पर किसान समय से उन पर नियंत्रण करें

Post By : Dastak Admin on 27-Aug-2018 22:43:34

soyabeen farming

 

भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सलाह

उज्जैन । भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इन्दौर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि खरीफ मौसम की फसल सोयाबीन में कीटों का प्रकोप होने पर उन पर समुचित एवं समय से नियंत्रण किया जाना आवश्यक है। जिन किसानों के सोयाबीन की फसलों में व्हाईट ग्रब (सफेद सुंडी) का प्रकोप है, वहां पर किसान इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 300 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा जैविक कीटनाशक क्व्यूवेरिया बेसियाना/मेटारायजियम इनाईसोप्ली 1 किलो प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरपाइरिफॉस 10जी 20 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें।

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन स्थानों पर गर्डल बिटल का प्रकोप शुरू हो गया हो, तो वहां पर थाइक्लोप्रिड 21.7एससी 650 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा ट्राइजोफॉस 40 ईसी 800 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। किसान अपनी फसल की सतत निगरानी करते हुए तंबाकू की इल्ली अथवा बिहार की रोएंदार इल्ली के समूह द्वारा ग्रसित पत्तियों या पौधों को पहचान कर उन्हें नष्ट करें। पत्ती खाने वाली इल्लियों के लिये पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासाइफ्लूथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिल 350 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा थाइमिथाक्सम+लेम्बड़ा सायहेलोथ्रिल 125 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इस उपाय से तना मक्खी एवं रस चूसने वाले कीट जैसे सफेद मक्खी का भी नियंत्रण होगा।

कृषि वैज्ञानिकों ने यह भी सलाह दी है कि सोयाबीन की फसल में पीला मोजाइक बीमारी को फैलाने वाली सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिये खेत में यलो स्टिकी ट्रेप का प्रयोग करें, जिससे मक्खी के वयस्क नष्ट किये जा सकें। पीला मोजाइक रोग से ग्रसित पौधों को खेत से निकालकर किसान नष्ट करें। इससे रोग को फैलने से रोकने में सहायता होगी। अधिक वर्षा होने पर सोयाबीन की खेत में जलभराव न होने दें। जिन स्थानों पर कई दिनों से वर्षा नहीं हुई है और तापमान थोड़ा अधिक हो गया है, वहां चारकोल रॉट नामक रोग का प्रकोप होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में किसान अपनी सोयाबीन की फसल में सिंचाई देकर इस प्रकोप को कम कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये अपने नजदीक के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय या सम्बन्धित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर समस्या का समाधान करवा सकते हैं।

 

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