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मीडिया प्रतिनिधि, पोषण के प्रति नागरिकों को जागरूक करें - महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस

मीडिया प्रतिनिधि, पोषण के प्रति नागरिकों को जागरूक करें - महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस

Post By : Dastak Admin on 08-Sep-2018 20:52:13

राष्ट्रीय पोषण माह


राष्ट्रीय पोषण माह के तहत एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला सम्पन्न 
बुरहानपुर |  पोषण का संबंध गरीबी या अमीरी से नही है, बल्कि गरीब परिवारों द्वारा खाये जाने वाले भोजन में बहुत अधिक पोष्टिक तत्व होते है। आवश्यकता पोषण के प्रति जन जागरूकता की है। इस कार्य में मीडिया प्रतिनिधियों की अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका है। यह बात प्रदेश की महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने राष्ट्रीय पोषण माह के तहत बुरहानपुर के होटल उत्सव में आयोजित एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज, चटनी, अचार, पत्तेदार व रेशेदार सब्जियां बहुत सस्ते होते है, लेकिन बहुत अधिक पोष्टिक तत्व इनमें पाए जाते है। कार्यशाला में यूनिसेफ भोपाल की कार्यक्रम अधिकारी सुश्री पुष्पा अवस्थी, वरिष्ठ पत्रकार तथा बाल अधिकार विशेषज्ञ नई दिल्ली श्री अजय सेतिया, महिला अध्ययन विभाग बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल श्रीमती आशा शुक्ला, बसंल न्यूज भोपाल के रीजनल हेड श्री शरद द्विवेदी, भोपाल के सोशल मीडिया विशेषज्ञ श्री संजीव परसाई एवं नई दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेश बादल, श्री प्रेम कुमार पगारे व डॉ. सोनाली नरगुंदे ने भी संबोधित किया। कार्यशाला में बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले के मीडिया प्रतिनिधि तथा कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह भी उपस्थित थे। 
    महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कार्यशाला में मीडिया प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने दायित्व समझे तथा महिलाओं एवं बच्चों के प्रति रिपोटिंग करते समय अत्यंत संवेदनशील होकर कार्य करें। उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के साथ साथ ‘‘बेटों को समझाओ‘‘ की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि पोषण के प्रति लोगों का ध्यान कम होता जा रहा है। पहले पोष्टिक खाना घर में खाते थे और फिल्म देखने बाहर जाते थे, लेकिन अब आधुनिकता के इस युग में सम्पन्न परिवार फिल्म घर में देखते है तथा खाना बाहर होटल में जाकर खाते है जो कि पोष्टिक व स्वच्छ नहीं होता है। उन्होंने कहा कि खाने में पोष्टिकता के साथ साथ स्वच्छता का विशेष महत्व रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 3 वर्ष पूर्व तक प्रदूषित भोजन के कारण हर वर्ष 4 लाख बच्चे मरते थे, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता के लिए संचालित अभियान के प्रभाव के कारण यह संख्या घटकर 3 लाख रह गई है। उन्होंने कहा कि हर घर में अस्वच्छता के कारण होने वाले रोगों से निपटने के लिए परिवार को वर्ष हजारों रूपये की दवाईयां लाना पड़ती है। केवल स्वच्छ रहकर इस खर्चे से बचा जा सकता है।
    महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने इस अवसर पर कहा कि पोषण को एक जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है जो कि मीडिया प्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग से ही संभव है। उन्होंने कहा कि खाने में सोयाबीन के तेल के स्थान पर तिल्ली, मूंगफली, नारियल के तेल उपयोग में लाये जाये तो परिवार के स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों एवं महिलाओं के एनीमिया से निपटने के लिए जरूरी है कि आयरन के साथ साथ उन्हें विटामिन सी का सेवन भी कराया जाये। इसके लिए खाने में चटनी , अचार जैसी खट्टी चीजे शामिल करना जरूरी है। 
    यूनिसेफ की कार्यक्रम अधिकारी पोषण सुश्री पुष्पा अवस्थी ने बताया कि बच्चे के गर्भ में आने के बाद के एक हजार दिन उसके जीवन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते है, अर्थात बच्चा जब दो वर्ष का होता है तब तक उसका शरीर बहुत तेजी से विकसित होता है। इस दौरान आयरन, प्रोटिन, विटामिन, खनिज लवण का भोजन शामिल होना अति आवश्यक है। उन्होंने छोटे बच्चों को दिन में 3 बार भोजन व 2 बार नाश्ता कराने की सलाह दी। प्रो. आशा शुक्ला ने मन का पोषण बुद्धि का पोषण व शरीर का पोषण पर संबोधित किया। श्री शरद द्ववेदी ने अपने संबोधन में कहा कि तनाव से बचने के स्थान पर तनाव के नियमन की आवश्यकता है। डॉ. नरगुंदे ने सोशल मीडिया को क्रिएटिविटी से जोड़ने की सलाह दी। कार्यशाला के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों को पोष्टिक तत्वों से युक्त विशेष स्वल्पाहार व भोजन कराया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने सभी मीडिया प्रतिनिधियों को पोषण से संबंधित संकल्प भी दिलाया।

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