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निर्वाना फाउण्डेशन बना लावारिस एवं विपत्तिग्रस्त महिला का सहारा

निर्वाना फाउण्डेशन बना लावारिस एवं विपत्तिग्रस्त महिला का सहारा

Post By : Dastak Admin on 10-Sep-2018 21:41:30

nirvana foundation

छतरपुर | महिला एवं बाल विकास विभाग, भारत सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था निर्वाना फाउण्डेशन, छतरपुर द्वारा संचालित स्वाधार गृह एक बार फिर विपत्तिग्रस्त एवं लावारिस महिला का सहारा बना है। रिंकी बेहेरा (उम्र 22 वर्ष) जिसे 03 सितम्बर 2018 को वन स्टॉप सेंटर, छतरपुर के माध्यम से रात को 1 बजे लावारिस हालत में मातगुवां पुलिस द्वारा आश्रय हेतु लाया गया था। महिला की शिनाख्त और पूछताछ करने के बाद पता चला की रिंकी बेहेरा जो कि उड़ीसा की रहने वाली है, उसे दो लड़के बहला भुसला कर घुमाने के बहाने उड़ीसा से ट्रेन में बिठाकर 2 सितम्बर 2018 को दमोह ले आये थे और वहां से उसे अपने साथ बस में बिठाकर छतरपुर ले आये। दोपहर को खाना खिलाने के बहाने वो उसे किसी के घर पर ले कर गए और वहां जाने के बाद जब रिंकी को पता चला कि वो दोनों लड़के उसे छतरपुर में बेचने के लिये लाये हैं, तब वो घर से बाहर निकल आई और सड़क की तरफ़ दौड़ने लगी और तभी उसे पुलिस वाले दिखाई दिए और रिंकी ने उनके पास जाकर आप बीती बताई और पुलिस ने तुरंत उन दोनों लड़को को गिरफ्तार करके मातगुवां थाना ले गयी। थाने में पूछताछ करने के बाद सारी सच्चाई का पता चला और रात हो जाने की वजह से पुलिस द्वारा रिंकी को वन स्टॉप सेंटर छतरपुर लाया गया और वहां से उसे आश्रय हेतु निर्वाना फाउण्डेशन द्वारा संचालित स्वाधार गृह में भेजा गया। 
   03 सितम्बर 2018 को रात 1.00 बजे प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिंकी को निर्वाना फाउण्डेशन में रख लिया गया था। पिछले दो-तीन दिनों से ट्रेन में लम्बा सफ़र करते करते और भूखे प्यासे रहते रहते रिंकी काफ़ी थकी हुई थी और उसे बहुत तेज भूख लगी थी। उसे रात को खाना खिलाकर सुला दिया गया। सुबह जब रिंकी की काउंसलिंग की गयी तब उसने सारी कहानी बताई और अपने घर परिवार के बारे में बताया। उड़ीसा की होने की वजह से उसे हिंदी बोलने में काफी मुश्किल हो रही थी, लेकिन निर्वाना फाउण्डेशन के संस्थापक संजय सिंह द्वारा जब उससे बंगाली भाषा में बात की गयी तो वो उनको सब कुछ अच्छे से बताने लगी। जब रिंकी ने अपने पिता और भाई का मोबाइल नंबर बताया तब रिंकी के घर पर फोन लगाकर उन्हें रिंकी के बारे में पूरी जानकारी दी गयी और यह बताया गया की उनकी बच्ची एकदम स्वस्थ एवं सुरक्षित है। अपनी बेटी के बारे में जानकर घर वालों को बहुत ख़ुशी हुई और सब लोग बच्ची के लिये दुआएं मांगने लगे। रिंकी के पिता और भाई 5 सितम्बर को उड़ीसा से ट्रेन में बैठकर 6 सितम्बर कि दोपहर 1 बजे निर्वाना फाउण्डेशन छतरपुर पहुंचे और वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से जिला उप दण्डाधिकारी के निर्मुक्ति आदेश पर रिंकी बेहेरा को सारी कागज़ी कार्यवाही करने के बाद उसके पिता हरिहर बेहेरा और भाई दीपक बेहेरा को सुपुर्द कर दिया गया और वो ख़ुशी-ख़ुशी अपने गाँव लौन्द्रेजोर उड़ीसा वापस चली गयी। एक बार फिर निर्वाना फाउण्डेशन, महिला एवं बाल विकास विभाग (वन स्टॉप सेंटर) और पुलिस प्रशासन छतरपुर की वजह से एक विपत्तिग्रस्त महिला समाज की कुरीतियों का शिकार होने से बच गयी और उसे सुरक्षित उसके घर उड़ीसा पंहुचा दिया गया।

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