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प्रदेश में एक बार फिर गौरान्वित हुआ बालाघाट जिला, ’’सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्यों हेतु हुआ पुरस्कृत’’

प्रदेश में एक बार फिर गौरान्वित हुआ बालाघाट जिला, ’’सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्यों हेतु हुआ पुरस्कृत’’

Post By : Dastak Admin on 12-Aug-2018 17:45:25

solar energy


बालाघाट | बालाघाट कलेक्टर श्री डी. व्ही. सिंह के कुशल नेतृत्व में बालाघाट जिला निरंतर सफलता के नये आयाम छू रहा है। इसी श्रृंखला में बालाघाट जिले में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में करवाये गये उत्कृष्ठ कार्यों हेतु जिले को सम्मानित किया गया है। भोपाल में आयोजित एक भव्य समारोह में श्री एस. आर. मोहंती, अतिरिक्त मुख्य सचिव, म.प्र. शासन एवं श्री मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, म.प्र. शासन द्वारा यह पुरस्कार श्री पी. के. जैन, जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी, जिला बालाघाट को प्रदान किया गया तथा जिले में संपादित किये गये कार्यों की प्रशंसा भी की गई। उल्लेखनीय है कि श्री मोहंती एवं श्री मनु श्रीवास्तव दोनो ही पूर्व में बालाघाट जिले के कलेक्टर रह चुके हैं।
    बालाघाट जिले में म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा सौर ऊर्जा पर आधारित अनेंकों परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया है जिससे न केवल पारंपरिक विद्युत एवं ऊर्जा के स्त्रोंतों की बचत हो रही है अपितु पर्यावरण का संरक्षण भी हो रहा है। इन योजनाओं पर आकर्षक शासकीय अनुदान भी उपलब्ध है। बालाघाट कलेक्ट्रेट भवन प्रदेश का पहला कलेक्ट्रेट भवन है जहाँ पर 100 किलोवाट क्षमता के नेटमीटरिंग पद्धति पर आधारित सौर संयंत्र की स्थापना का कार्य पूर्ण कर इसे विद्युत वितरण कम्पनी की ग्रिड से संयोजित किया जा चुका है। जिससे कलेक्टरेट भवन के बिजली के बिलों में भारी कमी आई है। इस स्थापित संयंत्र द्वारा औसतन 400 यूनिट्स विद्युत का उत्पादन प्रतिदिन हो रहा है तथा संयंत्र की स्थापना के उपरांत आज दिनांक तक लगभग एक लाख 50 हजार विद्युत यूनिट्स उत्पादित हो चुकी है जिसका लाभ कलेक्टरेट भवन को मिल रहा है। 
    इसके अतिरिक्त स्वास्थ विभाग के लिए शासकीय जिला चिकित्सालय बालाघाट, ट्रॉमासेंटर बालाघाट, सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र परसवाड़ा, बैहर, बिरसा, लांजी, कटंगी, लालबर्रा, खैरलांजी, रामपायली एवं किरनापुर में विभिन्न प्रकार एवं क्षमताओं के सौर संयत्रों की स्थापनाऐं करवाई जा चुकी हैं तथा म.प्र. ऊर्जा विकास निगम के प्रधान कार्यालय भोपाल द्वारा बालाघाट जिले के 20 प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों एवं सिविल अस्पताल वारासिवनी हेतु कार्यादेश जारी किये जा चुके हैं। जहाँ पर शीघ्र ही इन संयंत्रों की स्थापना का कार्य शुरू किया जायेगा। इसके अतिरिक्त बालाघाट जिले में स्वास्थ विभाग के अंतर्गत् 338 उपस्वास्थ केन्द्रों हेतु भी सौर संयंत्रों की स्थापना हेतु आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। 
    जिले का एक अन्य मुख्य कार्यालय, जिला पंचायत भवन हेतु भी कार्यादेश जारी किये जा चुके हैं जहाँ पर शीघ्र ही सौर संयंत्र की स्थापना की जायेगी। इसी प्रकार बालाघाट जिले के 33 पुलिस थानों/चौकियों में भी सौर संयंत्रों की स्थापना करवाई जा चुकी हैं एवं जिले की तीन जेलों बैहर, वारासिवनी एवं बालाघाट में भी सौर संयंत्र स्थापित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त जिले के अनेक अन्य शासकीय भवनों जैसे कि खेल परिसर बैहर, फिश फार्म मुरझड़, नगरपालिका परिसर मलाजखंड, शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय बालाघाट, भारत दूरसंचार निगम बालाघाट पर भी विभिन्न प्रकार एवं क्षमताओं की सौर परियोजनाऐं स्थापित की जा चुकी हैं तथा कई अन्य शासकीय भवनों जैसे कि जिले के शासकीय महाविद्यालय, औद्यागिक प्रशिक्षण संस्थान, जिले के बालाघाट, वारासिवनी, कटंगी एवं बैहर स्थित न्यायालय, कार्यालय नगर परिषद लांजी, कार्यालय जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र बालाघाट, कार्यालय डिस्ट्रिक्ट कमांडेट होमगार्ड, तहसील कार्यालय खैरलांजी, नगर परिषद कार्यालय कटंगी एवं इससे संबंधित अन्य भवनों इत्यादि के प्रस्ताव प्रक्रियाधीन हैं। 
    नगरपालिका परिषद बालाघाट के जल शोधन एवं शुद्धीकरण केन्द्र हेतु दो पांच-पांच सौ कि.वॉ. क्षमता के संयंत्रों के प्रकरण विचाराधीन हैं, अगर इनका क्रियान्वयन होता है तो नगर पालिका परिषद बालाघाट अपने बिजली के बिलों में लाखों रूपयों की बचत कर सकेगी। इस योजना में जिले के सभी एस.डी.एम. कार्यालय भी शामिल किये जायेंगे जिस हेतु शीघ्र ही सर्वेक्षण कार्य की शुरूआत की जायेगी। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जिले के सभी 228 हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों को भी शामिल किया गया है, इनमें से वर्तमान में सात स्कूलों हेतु कार्यादेश जारी हो चुके हैं तथा शेष स्कूलों हेतु कार्यवाही जारी है। इन परियोजनाओं से होने वाली विद्युत की बचत एवं अन्य फायदों को देखते हुए निजी क्षेत्र के उपभोक्ताओं का रूझान भी इस ओर बढ़ रहा है तथा बालाघाट शहर के दो उपभोक्ता श्री नारायण शांडिल्यकर एवं श्री रमेश कुमार डोहरे द्वारा अपने आवासों में ग्रिड कनेक्टेड सौर संयंत्रों की स्थापना करवाई गई है तथा वे इसकी स्थापना से अत्यंत खुश हैं क्योंकि इससे उनके बिजली के बिलों में काफी कमी आई है। 
    विदित हो कि म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा ग्रिड कनेक्टेड नेट मीटरिंग के विनियमन जारी किये गये हैं जिसके तहत कोई भी विद्युत उपभोक्ता अपने भवन की छत पर या अन्य रिक्त स्थान पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगा सकेगा व इसका सीधा लाभ उपभोक्ता को उसके बिजली के बिल में मिलेगा। सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को उपभोक्ता स्वयं उपयोग करेगा जिससे जहाँ पर विद्युत वितरण कम्पनी से ली जा रही बिजली में सीधी कमी आयेगी, वहीं पर्यावरण की रक्षा भी होगी। अवकाश के दिनों में और कतिपय अन्य समय पर जब भी सौर ऊर्जा का उत्पादन उपभोक्ता की खपत से अधिक होगा तब अतिशेष ऊर्जा विद्युत वितरण कम्पनी के ग्रिड में निर्यात कर दी जायेगी जिसका समायोजन उपभोक्ता के बिजली के बिल में किया जायेगा। इसके अतिरिक्त ऐसे स्थल जहाँ पर रात्रिकालीन समय में विद्युत की उपलब्धता की समस्या है, वहाँ पर बैटरी बैंक सहित सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जा सकती है। इन योजनाओं की महत्ता को देखते हुए शासन द्वारा इन पर आकर्षक अनुदान भी दिया जा रहा है।
    विद्युत प्रदाय करने हेतु सौर ऊर्जा संयंत्रों के अतिरिक्त म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा जिले में कुल 108 सोलर हैंड पंप स्थापित करवाये गये हैं जिनमें से अधिकांश पंप लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग हेतु पेय जल प्रदाय करने हेतु ग्रामों में स्थापित किये गये हैं। इन पंपों की स्थापना के उपरांत ग्रामीणों को पेय जल संकट से निजात मिल सकी है।
    म.प्र. ऊर्जा विकास निगम और कृषि विभाग के माध्यम से संचालित मुख्य मंत्री सोलर पंप योजना भी दिन-प्रतिदिन अत्यंत लोकप्रिय हो रही है। यह योजना कृषकों के लिये लागू की गई है जिसमें 1 से 3 एच.पी. क्षमता के सोलर पंप 90ः अनुदान पर, 5 एच.पी. क्षमता के पंप 85 प्रतिशत अनुदान पर तथा 7.5 एच.पी. और 10 एच.पी. के पंप भी अनुदानित मूल्य पर किसानों को उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस अनुदानित मूल्य में पांच वर्षों का रखरखाव भी शामिल है। इस योजना का उद्देश्य उन किसानों को लाभ पहुंचाना है जिनके यहाँ बिजली की उपलब्धता नहीं है या जहाँ पर किसानों को सिंचाई के लिये डीज़ल पंप का इस्तेमाल कर भारी खर्च करना पड़ता है या जहाँ पर अस्थाई विद्युत कनेक्शन है या बिजली की लाइन बहुत दूर है या बिजली की अत्याधिक कटौती है या किसान पूर्ण रूप से वर्षा ऋतु पर आश्रित है। इस योजना के तहत बालाघाट जिले में अब तक 125 किसानों के यहाँ सोलर पंप की स्थापना करवा दी गई है जिससे लाभान्वित होकर किसान इस योजना को वरदान बता रहें हैं तथा इन पंप्स की मांग में निरंतर वृद्धी हो रही है।
    इसी प्रकार भारत सरकार के उपक्रम ’’एनर्जी इफीशियेंसी सर्विसेज लि.’’ द्वारा बालाघाट जिले में ’’उजाला’’ योजना के तहत ऊर्जा दक्षता एवं बिजली की बचत को प्रोत्साहित करने हेतु एल.ई.डी. बल्ब, ट्यूब लाइट एवं ऊर्जा दक्ष पंखों का वितरण शासन द्वारा अनुदानित मूल्य पर करवाया गया है। आज तक बालाघाट जिले में लगभग 2 लाख 56 हजार एल.ई.डी. बल्ब, 1100 ट्यूब लाइट एवं 1600 ऊर्जा दक्ष पंखों का वितरण किया जा चुका है।
    बालाघाट जिले में संपादित करवाये गये इन कार्यों से कार्बन-डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन में प्रतिवर्ष 81 हजार 903 टन की कमी हुई है जिसके लिये हमें 14 लाख वृक्ष लगाने होते। इस प्रकार की परियोजनाओं से न केवल वित्तीय लाभ की प्राप्ती होती है वरन हरित क्रांति के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण कदम भी है।

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