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मेला क्षेत्र

Post By : Dastak Admin on 01-Oct-2015 14:40:36

उज्जैन का सिंहस्थ मेला पुण्य सलिला शिप्रा के पूर्व एवं पश्चिमी तटों पर लगता है । यह मेला शिप्रा के पश्चिमी तट के खुले क्षेत्र के साथ-साथ पूर्व तट के शहरी क्षेत्र मेंभी लगता है । वर्ष 1980 में सिंहस्थ मेला 613 हेक्टयर क्षेत्र में लगा था जिसमें करीब 25 लाख श्रद्धालु आये थे । सिंहस्थ 1992 के दौरान यह मेला 1367 हेक्टयर क्षेत्र में फैला था जिसमें करीब 1.25 करोड़ श्रद्धालु आये थे । गत सिंहस्थ वर्ष 2004 के सिंहस्थ हेतु 2151.976 क्षेत्र निर्धारित किया गया था, जिसमें 3 करोड़ श्रद्धालु आये थे । सिंहस्थ-2016 हेतु इस बार लगभग 3000 हेक्टयर क्षेत्र को मेला क्षेत्र घोषित किया गया है । इस बार लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है । इस मेला क्षेत्र में विभिन्न साधु समाज अपने कुछ स्थाई आवास एवं अस्थाई टेंट लगाकर विराजित होते हैं ।
    सिंहस्थ मेले का आयोजन मुख्यतः रामघाट, दत्त अखाड़ा, अंकपात एवं महाकाल में है । उज्जैन मेला क्षेत्र में प्रवेश के पूर्व दशनामी साधु समाज नीलगंगा क्षेत्र में पड़ाव डालते हैं इस कारण नीलगंगा क्षेत्र भी सिंहस्थ मेला क्षेत्र है । सम्पूर्ण मेला अवधि में श्रद्धालु उज्जैन आते हैं और सिंहस्थ मेले का पुण्य लाभ अर्जित करते हैं । सिंहस्थ मेला अवधि में पड़ने वाले स्नान पर्वा का विशेष महत्व होता है । इसलिए इन पर्वा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण आते हैं । इन श्रदालुओं का मुख्य उद्देश्य रामघाट पर स्नान, महाकाल, हरसिद्धि, गोपाल मंदिर, मंगलनाथ, कालभैरव, शनि मंदिर एवं अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों के दर्शन करने के साथ–साथ मेले मेंआये हुए विभिन्न साधु–संतों के दर्शन तथा उनके कार्यक्रमों में भाग लेना होता हैं । कुछ श्रद्धालु एक या दो दिनों तक अपने रिश्तेदारों अथवा विभिन्न सम्प्रदाय के अखाड़ों या अपने समाज की धर्मशाला में जाकर निवास करते हैं । शहर तथा मेला क्षेत्र एक दूसरे के साथ जुड़े होने से तथा मेला क्षेत्र के मार्ग शहर से होकर जाने से सम्पूर्ण उज्जैन शहर भी मेला क्षेत्र का एक अंग बन जाता है । इस प्रकार सम्पूर्ण मेला क्षेत्र को निम्न क्षेत्रों में बांटा गया है –

रामघाट क्षेत्र - यह क्षेत्र लाल पुल, कर्कराज मंदिर से लेकर बड़नगर ब्रिज तक क्षिप्रा नदी के पूर्व तट पर स्थित है जो मुख्य स्नान क्षेत्र है । मुख्य स्नान घाट के अलावा इस क्षेत्र में निम्न महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है ।
    1.श्री कर्कराज मंदिर, 2. श्री योगमाया मंदिर, 3. श्री वीर दूर्गादास की छत्री, 4. वाल्मीकि धाम (घाट स्थल),       5. मौलाना साहब की दरगाह, 6. पंचायती उदासीन अखाड़ा

दत्त अखाड़ा – यह क्षेत्र लाल पुल, भूखीमाता से दत्त अखाड़ा, बड़नगर ब्रिज तक क्षिप्रा जी के पश्चिमी तट पर स्थित है । इस क्षेत्र में मुख्य स्नान घाट के अलावा निम्न महत्वपूर्ण स्थल है - 1. संन्यासियों एवं साधुओं के अखाड़े, 2. विभिन्न प्रदर्शनियाँ,              3. मेला, 4. अन्न क्षेत्र, 5. श्री उजड़खेड़ा हनुमान मंदिर, 6. श्री रंजीत हनुमान मंदिर, 7. श्री चिन्तामन गणेश मंदिर,                         8. भूखीमाता मंदिर ।

महाकाल क्षेत्र – यह क्षेत्र जयसिंहपुरा से गोपाल मंदिर तक फैला है । इसमें स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल निम्नानुसार है -             1. श्री महाकालेश्वर मंदिर, 2. श्री हरसिद्धि मंदिर, 3. श्री बड़ा गणपति मंदिर, 4. श्री चारधाम मंदिर, 5. गोपाल मंदिर,                    6.  श्री नागचन्द्रेश्वर मंदिर, 7. जगतगुरु शंकराचार्य एवं विद्वानों के केम्प ।

अंकपात – यह क्षेत्र मंगलनाथ से खाकचौक, गढ़कालिका तथा भर्तृहरि गुफा तक फैला है । इस क्षेत्र में निम्न मुख्य स्थल है –       1. गंगाघाट (स्नान घाट एवं आश्रम), 2. मंगलनाथ (स्नान घाट एवं श्री मंगलनाथ मंदिर), 3. सांदीपनि आश्रम, 4. श्री राम जनार्दन मंदिर, 5. श्री भर्तृहरि गुफा, 6. पीर मछंदर नाथ, 7. श्री ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर, 8. संन्यासियों एवं साधुओं के अखाड़े, 9. कालियादेह महल (कुण्ड एवं सूर्य मंदिर)

भैरवगढ़ क्षेत्र – यह क्षेत्र कालभैरव, विक्रांत भैरव से सिद्धवट, कालियादेह महल तक फैला है । इस क्षेत्र में मुख्य स्थल है – 1. श्री सिद्धवट (स्नान घाट एवं श्री सिद्धवट मंदिर), 2.श्री काल भैरव मंदिर, 3. कालियादेह महल (कुण्ड एवं सूर्य मंदिर), 4. श्री विक्रांत भैरव मंदिर

नीगगंगा क्षेत्र – यह क्षेत्र शनि मंदिर से गऊघाट तक फैला है जो मुख्यतः इंदौर की ओर से आने वाले मार्ग एवं उसके पास स्थित है । इसमें निम्न महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं – श्री नवगृह शनि मंदिर, त्रिवेणी घाट, श्री प्रशांति धाम (श्री सांई बाबा मंदिर), गऊघाट (स्नान घाट), यंत्र महल (वेधशाला), नीलगंगा तालाब एवं अखाड़ा स्थल ।

शहर क्षेत्र – इस क्षेत्र में निम्न मुख्य स्थल है – 1. रेलवे स्टेशन, 2. विभिन्न होटल एवं धर्मशालाएँ, 3. बाजार क्षेत्र,   4. पंचक्रोशी मार्ग, 5. श्री गेबी हनुमान मंदिर, 6. श्री सत्यनारायण मंदिर, 7. श्री बृहस्पति मंदिर, 8. श्री नगर कोट माता मंदिर, 9. श्री चामुण्डा माता मंदिर, 10. श्री सावन–भादवा माता मंदिर, 11. सम्पूर्ण शहरी क्षेत्र ।
 

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