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अखाड़ों का इतिहास

Post By : Dastak Admin on 01-Oct-2015 14:46:07

ऐसा माना जाता है कि अखण्ड शब्द का भ्रंश रूप अखाड़ा है । अखाड़ों का निर्माण राï­ एवं हिन्दू संस्कृति की रक्षा के bिए हुआ था । अखाड़ों में शास्त्र एवं शस्त्र, धर्म तथा सेना, ब्राह्मण तथा क्षत्रियों को समन्वित किया गया था । संन्यासियों को संगठित करने हेतु तीर्थ, आश्रम, वन, अरण्य, गिरि, पर्वत, सागर, सरस्वती, भारती, पुरी नामों से विभाजन हुआ । संन्यासी के रूप में तीर्थ, आश्रम, सरस्वती, भारती एवं दंडी संन्यासियों को ही मानकता है । दंडी संन्यासी केवल ब्राह्मण के लिए आरक्षित है । संन्यासियों का काम केवल धर्म प्रचार करना था । संन्यासियों की प्रतिभा के उपयोग के लिए शंकराचार्य ने 4 मठों की स्थापना की थी । बद्री केदारनाथ ज्योतिर्मठ, श्रंगेरी  मठ, गोवर्धन मठ और शारदा मठ ।
शैव अखाड़े
    अखण्ड भारत में मुगलों, यवनों के आक्रमण हुए तब उनकी रीति–नीति के कारण हिन्दुओंपर अत्याचार बढ़े । हिन्दू धर्म का पतन होने पर संन्यासियों ने शास्त्र छोड़ शस्त्र का सहारा लिया और मुगलों को कई जगह परास्त किया । देश के विभिन्न भागों में अखाड़ों की स्थापनाएँ हुई । नागा संन्यासियों द्वारा नाना साहब और रानी लक्ष्मीबाई की मदद कर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने का अपना इतिहास है । शैव सम्प्रदाय के सात प्रमुख अखाड़े है ः-
1.     श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा
2.     श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा
3.     श्री तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा
4.     श्री पंचायती अटल अखाड़ा
5.     श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा
6.     श्री पंचदशनाम आह्वान अखाड़ा
7.     श्री पंचअग्नि अखाड़ा
उदासीन अखाड़ा
    इस पंथ के तीन प्रमुख अखाड़े हैं –
1.     बड़ा उदासीन अखाड़ा
2.     नया उदासीन अखाड़ा
3.     निर्मल पंचायती अखाड़ा

वैष्णव अखाड़े
    ऐसा माना जाता है कि रामानुज समुदाय की छुआछूत संबंधी कट्टर मान्यता से असहमत होने के कारण श्री रामानन्द ने बैरागी सम्प्रदाय की स्थापना की थी । श्री रामानन्द के समय हिन्दुओंकी सामाजिक स्थिति गिर चुकी थी । सिंकदर लोधी (सन्  1489-1517) के समय हिन्दुओं पर अत्याचार बढ़ता गया । सन् 1298 में तेमूर ने हरिद्वार में बड़ी संख्या में बैरागियों की हत्या करवा दी । वैष्णव बैरागियों के अखाड़ों का संगठन 1650 से 1700 के बीच हुआ । वैष्णव सम्प्रदाय के तीन प्रमुख अखाड़े हैं –
1.     निर्मोही अखाड़ा
2.     दिगम्बर अखाड़ा
3.     निर्वाणी अखाड़ा
    इस तरह दोनों सम्प्रदाय और एक पंथ के 13 अखाड़े हैं ।

 

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