खास खबरें प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीब परिवारों को बनाया पक्के घरों का मालिक इस क्षेत्र में मिलेंगी सबसे ज्यादा नौकरियां, प्रोफेशनल्स की बढ़ रही डिमांड अमेरिकी ने लगाए चीन पर प्रतिबंध, बौखलाहट में उठाया यह कदम 'गोल्‍डन ग्‍लोब' रेस में हिस्‍सा ले रहे भारतीय नौसेना के अभिषेक भीषण तूफान में फंसे, बचाव दल रवाना पाकिस्‍तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक ने राहुल गांधी को पीएम बनाने की तरफदारी सनी लियोन को मिला था 'गेम ऑफ थ्रोन्‍स' में काम करने का मौका, इसलिए कर दिया मना... सेंसेक्स 110 अंक , निफ्टी 11100 के नीचे मिंटो हॉल अन्तर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के रूप में तैयार पति-पत्नि के बीच हुआ झगड़ा, पति ने की किस करने की कोशिश, पत्‍नी ने काट दी जीभ आज से शुरू होगा, पितृों का पूजन-तर्पण, पूर्णिमा का होगा पहला श्राद्ध

उज्जैन इतिहास

Post By : Dastak Admin on 20-Oct-2015 13:12:32

मध्यप्रदेश के मालवा में उत्तरवाहिनी शिप्रा तट पर भारत की प्राचीनतम, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक  एवं धार्मिक  नगरी उज्जयिनी अवस्थित है । उज्जयिनी का इतिहास हमारे देश की सांस्कृति धरोहर है । प्रत्येक  कल्प में उज्जयिनी के नाम बदलकर रखे गये थे । श्वेतवराह कल्प में इसका नाम 'उज्जयिनी' है, जो इसकी प्राचीनता का ज्ञान कराती है । सूत्र ग्रन्थों एवं पुराणों में उज्जयिनी के जो वर्णन है, उसके आधार पर यह नगर 5 हजार वर्ष पूर्व से भी विद्यमान है ।
    भागवद के स्कन्द में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम दोनों भाताओं को विद्यार्जन हेतु अवन्तिका में गुरुदेव सान्दीपनि ऋषि के आश्रम में आने की कथा कही गई है । श्रीरामचरित मानस; श्रीकृष्ण चरित से पूर्व माना जाता है । श्री रामायण के किष्किंधाकाण्ड  में भी श्री सीता देवी के अन्वेषणार्थ वानर दल को रवाना करते समय सुग्रीव ने अवन्ति देश का उल्लेख किया है । अत: इससे भी इसका अस्तित्व 5 हजार वर्ष पूर्व सहज ही स्वीकार्य योग्य है ।
    प्राचीन नगरी वर्तमान उज्जैन से उत्तर में थी जो आज गढ़कालिका नामक  क्षेत्र से विख्यात है । प्राचीन भारत की समय गणना का केन्द्र बिन्दु होने के कारण ही काल के आराध्य महाकाल है जो भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक  है ।
    उज्जयिनी क्षिप्रा नदी से सिंचित क्षेत्र है । उपजाऊ  काली मिट्टी का क्षेत्र और मालवा के पठार का सबसे ऊँ चा नगर होने का इसे गौरव प्राप्त है । प्राचीन भारतीय साहित्य में उज्जयिनी कई नामों से प्रसिद्ध है । उज्जयिनी की अनेक  प्रकारों वाली सम्भ्रमकारी नामावली इस प्रकार है - अवन्तिका, पद्मावती, भोगवती, हिरण्यवती, कनकश्रृंगा, कुशस्थली, कुमुद्वती तथा प्रतिकल्पा । इसी में सेंट्रल इण्डिया गजेटीयर में ल्यूअर्ड (स्नंतक) द्वारा उल्लेखित नवतेरी नगर तथा शिवपुरी नाम और जुड़ जाते हैं । उज्जयिनी के 9 कोस चौड़ाई तथा 13 कोस लम्बाई के विस्तार से नवतेरी नगर नाम की उत्पत्ति मानी गई है । इन विभिन्न नामों का विवरण नीचे दिया जा रहा है -
उज्जयिनी
    उज्जयिनी जिस जनपद में थी उसका नाम अवन्ति था । जातक  साहित्य से ज्ञात हुआ है कि  अवन्ति का राजा चण्ड प्रद्योत उज्जयिनी में निवास करता था । इस बात की पुष्टि अन्य ग्रन्थों व संस्कृत साहित्य से होती है । स्कन्दपुराण के 28वें अध्याय में उल्लेख है कि  इस नगर के अधिष्ठाता देव महादेव ने त्रिपुरी के शक्तिशाली राक्षस अंधकासुर को पराजित कर विजय प्राप्त की । अत: स्मृति स्वरूप उज्जयिनी नाम रखा गया ।
अवन्तिका
    उज्जयिनी अवन्ति जनपद की महत्वपूर्ण नगरी थी; जो कालान्तर में राजधानी बन गई । इसी कारण अवन्तिका अवन्तिपुरी के नाम से विख्यात हो गई । मृच्छकटिकम्, दशकुमारचरितम् आदि में अवन्तिका, अवन्तिपुरी का उल्लेख है । स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि  अवन्तिका इसलिए कहा गया है कि  यह नगरी प्रतिकल्प की समाप्ति पर देवताओं के पवित्र स्थल, औषधि व प्राणियों की रक्षा करती है ।
कनकश्रृंगा
    नारदीय व स्कन्दपुराण में यह कनकश्रृंगा,  के नाम से प्रसिद्ध है । इस नाम के सम्बन्ध में कहा जाता है कि  उज्जयिनी के समीप कनकगिरी है । बाणभट्ट  ने कादम्बरी में उज्जयिनी वर्णन के समय सम्भवत: इसी कारण इसे कनकश्रृंगा,  कहा है ।
कुशस्थली
    कुशस्थली उज्जैन का अन्य नाम है । इस नाम का उल्लेख नारदीय व स्वन्दपुराण में मिलता है । स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि  यहाँ ब÷ा ने तर्पण किया था । कहते हैं ब÷ा ने कुशघास के तृण यहाँ फेंके थे । अत: इसका नाम कुशस्थली या ""हेम श्रृंगा' हुआ ।
पद्मावती
    जैन कवि सोमदेव ने अपने काव्यों ''यशस्तिलकचम्पू'' में उज्जयिनी के अधिपति का वर्णन पद्मावती, नगरी के राजा के रूप में किया है। पद्मावती  नाम धन सम्पदा को दर्शाता है। स्कन्द पुराण में लक्ष्मी के निवास के कारण पद्मावती  कहा है । कालिदास ने भी यहाँ पर मणिमाणिक्यों की प्रशंसा की है । उज्जयिनी मणियों के कारण प्रसिद्ध थी । यहाँ के उन्नत व्यापार का वर्णन किया गया है ।
कुमुद्वती
    पुष्प करण्डक  नदी, सरोवरों, उद्यानों से परिपूर्ण उज्जयिनी में हमेशा कुमुदिनी व कमल खिलते थे; अत: स्कन्द पुराण में कुमुद्वती कहा गया है । कुमुदिनी के उल्लेख के रूप में बाणभट्ट  ने कादम्बरी में सुन्दर उद्यानों और जलाशयों का उल्लेख किया है, जिनमें कमल खिले रहते थे ।
अमरावती
    अमरावती नाम देवतावास तथा सुन्दर रमणियों के कारण हुआ । पÙप्राभृतक व पादताडितक  साहित्य में इस नगर का अन्य देशों के साथ सम्बन्ध होने से इसे सार्वभौम नगर कहा जाता है । इसी कारण 10वीं शताब्दी के लेखक  पÙगुप्त परिमल ने उज्जयिनी को अमरावती कहा है ।
प्रतिकल्पा
    यह नगरी अपने पुरातन इतिहास के साथ जीवित होने के कारण स्कन्दपुराण में प्रतिकल्पा के नाम से भी जानी गई है । सोमदेव तथा कथासरित्सागर में इन चार युगों में कमश: पद्मावती,, भोगवती, हिरण्यवती व उज्जयिनी नाम बताये हैं
 

अपनी जानकारी दे

नाम
ई-मेल
मोबाइल
फोटो

आपके समाचार

शब्द प्रारूप और पाठ प्रारूप में समाचार फ़ाइल

Subscribe Newsletter




आपका वोट

अपना राशिफल देखें

मेष वृषभ मिथुन कर्क सिंह कन्या तुला वृश्चिक धनु मकर कुंभ मीन
मेष

आपकी सोच सकारात्‍मक रहेगीा जीवनसाथी से चली आ रही गलतफहमियां समाप्‍त होंगी। व्‍यापार में तरक्‍की हो सकती हैा अधिकारी आपसे प्रसन्‍न रहेंगेा मित्रों की सलाह काम आएगी। सेहत सामान्‍य।

महाकाल आरती समय

dastak news ujjain

  महाकाल आरती समय

आरती

चैत्र से आश्विन तक

कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक

भस्मार्ती

प्रात: 4 बजे श्रावण मास में प्रात: 3 बजे

प्रातः 4 से 6 बजे तक।

दध्योदन

प्रात: 7 से 7:45 तक

प्रात: 7:30 से 8:15 तक

महाभोग

प्रात: 10 से 10:45 तक

प्रात: 10:30 से 11:15 तक

सांध्य

संध्या 5 से 5:45 तक

संध्या 5 से 5:45 बजे तक

सांध्य

संध्या 7 से 7:45 तक

संध्या 6:30 से 7:15 तक

शयन

रात्रि 10:30 बजे

रात्रि 10:30 से 11 बजे तक

आज का विचार

    किसी के प्रति मन में क्रोध लिये रहने की अपेक्षा उसे तुरंत प्रकट कर देना अधिक अच्छा है, जैसे क्षणभर में जल जाना देर तक सुलगने से अधिक अच्छा है | – वेदव्यास -

विविध