खास खबरें मोगली बाल उत्सव- 2018, एप्को में राज्य स्तरीय ट्रेनर एवं क्विज मास्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सीबीएसई ने दी बच्‍चों और अभिभावकों को 'मोमो चैलेंज' से दूर रहने की चेतावनी राफेड विवाद में पाक ने अड़ाई अपनी टांग, कहा- सरकार कर रही पीएम मोदी को बचाने की कोशिश एशिया कप : रोहित-धवन ने जमाया शतक, पाकिस्‍तान पर 9 विकेट से भारत की धमाकेदार जीत समाजवादी पार्टी की ‘सामाजिक न्याय व लोकतंत्र बचाओ’ यात्रा पहुँची जंतर-मंतर, पार्टी संस्थापक और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भरी हुंकार सनी देओल-साक्षी तंवर स्‍टॉरर 'मोहल्‍ला अस्‍सी' आखिरकार इस दिन होगी रिलीज मुंबई में पेट्रोल के दाम पहुँचे 90 रूपये के करीब राष्ट्रीय स्कॉलरशिप परीक्षाओं के आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितम्बर बिहार के मुजफ्फरपुर में पूर्व मेयर समीर कुमार की कार में गोलियां से भून कर हत्‍या आज से शुरू होगा, पितृों का पूजन-तर्पण, पूर्णिमा का होगा पहला श्राद्ध

पंचक्रोशी यात्रा पंचेशानी यात्रा

Post By : Dastak Admin on 31-Oct-2015 14:29:36

भारत का प्राचीन ऐतिहासिक, धार्मिक  एवं सांस्कृतिक  नगर उज्जैन अपने में अनेक  विशिष्ट्रताएँ समेटे हुए है । परम पावन उज्जयिनीए तीर्थमयी नगरी के  रूपमें मान्यता प्राप्त है । भारत के  प्रमुख द्वादश ज्योतिर्लिंगोंमें से उज्जैन के महाकाल भी है । महाकालेश्वर स्वयं.भूू दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है । प्रधान शिवतीर्थ होने से यहाँ अनेक  देवता शिवलिंग स्वरूप में स्थित हैं । तीर्थ की चारों दिशाओं में क्षेत्र की रक्षा के लिए चार द्वारपाल शिवरूप में स्थित हैए जिनका उल्लेख स्कंदपुराण अन्तर्गत अवन्तिखण्ड में है । पंचेशानी यात्रा जिसे अपभ्रंश में पंचक्रोशी यात्रा कहते हैं, इन्हीं चार द्वारपालों की कथा पूजा विधानमें इष्ट्र परिक्रमा का विशेष महत्व हैंए पंचक्रोशी के मूल में इसी विधान की भावना है । पंचक्रोशी यात्रा वर्तमान में शिवयात्रा में शिव के  पूजन, अभिषेक, उपवास, दान, दर्शन की ही प्रधानता धार्मिक  ग्रंथों में मिलती है । स्कन्दपुराण के अनुसार अवन्तिका के  लिए वैशाख मास, प्रयाग के  लिए माघ और पुष्कर तीर्थ के  लिए कार्तिक मास अत्यंत पुनीत है, इसी वैशाख मास के मेष के मेषस्थ सूर्य में वैशाख कृष्ण दशमी से अमावस्या तक  इस पुनीत पंचक्रोशी यात्रा का विधान है । उज्जैन का आकार चौकोर है, क्षेत्र के  रक्षक  देवता श्री महाकालेश्वर का स्थान मध्य बिन्दु में है, इस बिन्दु के  अलग.अलग अंतर सेमंदिर स्थित है, जो द्वारपाल कहलाते हैं । इनमें पूर्वमें पिंगलेश्वर, दक्षिणमें कायावरूणेश्वर, पश्चिममें बिल्केश्वर तथा उत्तरमें दुर्दरेश्वर हैं । यह यात्रा अनादिकालमें प्रचलित थी, जिसे राजा विक्रमादित्य ने प्रोत्साहित किया, जो चौदहवीं शताब्दी से अबाध गति से चली आ रही है । कुछ  व्यवधानों के  पश्चात्मराठों के  राज्यमें इसे पुनरू गति मिली । यही यात्रा आज भी दिनों दिन उन्नति की और अग्रसर है । स्कन्दपुराण के अनुसार अनन्तकाल तक  काशीवास की अपेक्षा वैशाख मास मंे मात्र पाँच दिवस अवन्तिवास का पुण्यफल अधिक  है । वैशाख कृष्ण दशमी पर क्षिप्रा स्नान व नागचंद्रेश्वर पूजन के  पश्चात् पंचक्रोशी यात्रा आरम्भ होती है, जो 118 किलोमीटर की परिक्रमा करने के  पश्चात् कर्क तीर्थ वास में समाप्त होती है और तत्काल अष्ट्रतीर्थ यात्रा आरंभ होकर वैशाख कृष्ण अमावस को क्षिप्रा स्नान के  पश्चात् यात्रा का समापन विहित है ।
 
पंचक्रोशी यात्रा पड़ाव स्थल
    सिंहस्थ महाकुम्भ्ा 2016 की अवधि में वैशाख कृष्ण 9 रविवार दिनांक 1 मई 2016 से पंचक्रोशी यात्रा प्रारंभ होगी जो दिनांक  6मई 2016 को समाप्त होगी । इसी दिन द्वितीय स्नानपर्व भी है ।
    पंचक्रोशी यात्रा के  पड़ाव स्थल निम्नलिखित ग्रामोंमें रखे गये है -
1    पिंगलेश्वर
2    करोहन
3    नलवा
4    अम्बोदिया
5    कालियादेह
6    जैथल
7    उण्डासा





 

अपनी जानकारी दे

नाम
ई-मेल
मोबाइल
फोटो

आपके समाचार

शब्द प्रारूप और पाठ प्रारूप में समाचार फ़ाइल

Subscribe Newsletter




आपका वोट

अपना राशिफल देखें

मेष वृषभ मिथुन कर्क सिंह कन्या तुला वृश्चिक धनु मकर कुंभ मीन
मेष

आपकी सोच सकारात्‍मक रहेगीा जीवनसाथी से चली आ रही गलतफहमियां समाप्‍त होंगी। व्‍यापार में तरक्‍की हो सकती हैा अधिकारी आपसे प्रसन्‍न रहेंगेा मित्रों की सलाह काम आएगी। सेहत सामान्‍य।

महाकाल आरती समय

dastak news ujjain

  महाकाल आरती समय

आरती

चैत्र से आश्विन तक

कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक

भस्मार्ती

प्रात: 4 बजे श्रावण मास में प्रात: 3 बजे

प्रातः 4 से 6 बजे तक।

दध्योदन

प्रात: 7 से 7:45 तक

प्रात: 7:30 से 8:15 तक

महाभोग

प्रात: 10 से 10:45 तक

प्रात: 10:30 से 11:15 तक

सांध्य

संध्या 5 से 5:45 तक

संध्या 5 से 5:45 बजे तक

सांध्य

संध्या 7 से 7:45 तक

संध्या 6:30 से 7:15 तक

शयन

रात्रि 10:30 बजे

रात्रि 10:30 से 11 बजे तक

आज का विचार

    किसी के प्रति मन में क्रोध लिये रहने की अपेक्षा उसे तुरंत प्रकट कर देना अधिक अच्छा है, जैसे क्षणभर में जल जाना देर तक सुलगने से अधिक अच्छा है | – वेदव्यास -

विविध